Doctor Strike: आज से 3000 डॉक्टर हड़ताल पर, 2 दिन तक OPD-इमरजेंसी बंद, मरीज़ बेहाल
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 8 और 9 दिसंबर की हड़ताल के बाद भी उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो 10 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी

Doctor Strike: हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में आज से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है, क्योंकि हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMS) के आह्वान पर डॉक्टर दो दिवसीय हड़ताल पर जा रहे हैं। राज्य के 3900 सरकारी डॉक्टरों में से लगभग 3000 के इस हड़ताल में शामिल होने का अनुमान है, जिससे 28 सिविल अस्पतालों सहित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC/PHC) में मरीज़ों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगें सीनियर मेडिकल ऑफिसर (SMO) की सीधी भर्ती पर रोक लगाने और एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (ACP) के संशोधित ढांचे को जल्द से जल्द लागू करने से संबंधित हैं।

सरकारी अधिकारियों और डॉक्टर्स एसोसिएशन के बीच तीन दौर की लंबी बातचीत हुई। शुरुआती चरण में सरकार ने SMO की सीधी भर्ती प्रक्रिया को रोकने पर सहमति जताई, जिसे एसोसिएशन ने अपनी जीत बताया। हालाँकि, ACP की मांग पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका, जिसके कारण गतिरोध बना हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि संशोधित ACP लागू होने से उनका वेतनमान बढ़कर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के समकक्ष हो जाएगा।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 8 और 9 दिसंबर की हड़ताल के बाद भी उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो 10 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी, जिससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।
डॉक्टरों और सरकार के बीच मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव और स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तीन दौर की चर्चाएँ हुईं। HCMS के राज्य कोषाध्यक्ष डॉ. दीपक गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री ने संशोधित ACP ढांचे को मंज़ूरी दे दी है, लेकिन वित्त विभाग द्वारा अभी तक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, जिसके कारण यह मामला लंबे समय से अटका हुआ है।
हड़ताल के दौरान न केवल सामान्य ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी, बल्कि आपातकालीन सेवाएं (Emergency Services) और पोस्टमॉर्टम आदि भी बाधित होंगे। सोमवार को सरकारी अस्पतालों में मरीज़ों की संख्या आमतौर पर अधिक होती है, ऐसे में दो दिन की इस पूर्ण हड़ताल से मरीज़ों की देखभाल पर गंभीर असर पड़ना तय है।डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज़ मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे हड़ताल का समय बढ़ा सकते हैं।











